कल इशा नमाज के बाद मुफ्ती साहब बातचीत और गुफ्तगू के आदाब बताए:-
1. बातचीत नरम लहजे़ मे अच्छे अख्लाक़ से करे।
2. न इतना धीमा बोले कि सामने वाला सुन न सके और न इतना जो़र से बोले कि सामने वाले को लगे कि रौब झाड़ रहा है।
3. चीखना चिल्लाना अगर अच्छा होता तो गदहा की आवाज़ को अच्छा बोला जाता लेकिन इसे सबसे खराब आवाज़ कहा जाता है।
4. जो भी बोले, सच बोले चाहे इसमे नुकसान ही क्यूं न नज़र आए।
5. जब भी बोले इंसाफ की बात बोले चाहे इससे अपनों का नुकसान ही क्यूं न हो।
6. बिना जरूरी न बोले।
7. औरतें (अगर जरूरी हो) नामहरम (अजनबी) मर्दों से नरमी से बात न करे बल्कि बातों मे हल्की सख़्ती हो
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